Essay über die Rückkehr zur Waage | Hindi | Produktionsfunktion | Wirtschaft

Hier ist ein Aufsatz zum Thema "Returns to Scale" für die Klassen 9, 10, 11 und 12. Hier finden Sie kurze und lange Absätze zum Thema "Returns to Scale", die speziell für Schüler und Studenten in Hindi geschrieben wurden.

Essay über die Rückkehr zum Maßstab


Essay Inhalt:

  1. पैमापैम के प्प की परिभाषा (Einführung in Return to Scale)
  2. पैमापैम के प्प की अवस्अवसाएँ (Bedingungen für die Rücksendung nach Maß)
  3. पैमापैम के्प रतिफल्धाध तत्तत (Ermittlung der Elemente der Skalenrendite)
  4. पैमापैम की की (Economies of Scale)
  5. पैमापैम की हानियाँ (Diseconomies of Scale)


Essay # 1. पैमा Introduction के के्रतिफल की परिभापरिभा (Einführung in Return to Scale):

पैमापैम के प्प उत्उताप फलन की की्घकाघक प्रवृत्रवृत को सूचित करते हैं हैं दीर्दीराघक में कोई कोई्उत्पत का सास स्स नहीं नहींा। सभी उत्पत्ति के केाधन परिवर्परिवर हो जाज हैं हैंा उन्उन आवश्यकतायकतार परिवर्परिवर तिता जा सकता है है सभी सभी्पत्ति साधनों के्परिवर्परिवर होने केाक उत्उताप का पैमाना (Maßstab der Produktion) परिवर्परिवर किया जा सकता है है

उत्उतादन तकनीक मेंार, श्श-विभाजन, विशिष्टीकरण आदि उत्पाप में आन्तरिक एवं बाब्ह बचतें (Interne & Externe Wirtschaft) प्रार्प होती बाब्ह आन्आन और लेती लेती हैं

आरम्आरम भ आन्ये तरिक बाब्ह बचतें पैमापैम के के्प (Erhöhen der Skalierungsrenditen) इन इन प्प के बीच की पैमापैम के स्स प्रतिफल (konstante Rückkehr zum Maßstab) की) है


Essay # 2. पैमा Conditions के प्रतिफल की अवस्अवसाएँ (Bedingungen für die Rückgabe an die Waage):

इस प्रकार पैमापैम के के्प रतिफल की अवस्अवसाथ होती हैं:

ein. पैमापैम के बढ़ते बढ़ते्प (Steigerung der Skalenerträge) |

b. पैमापैम के स्स प्प (Konstante Return to Scale) |

c. पैमापैम के घटते घटते्प (Abnehmende Skalenerträge) |

ein. पैमापैम के बढ़ते प्प (Steigerung der Skalenerträge):

जब जब पत्ति्पत के सास को को्निश अनुपात में मेंाया जाता है है्पैम्गत उत्पाप उस अधिक्निश चिताअनुप सेाज अधिक अधिकाअनुप त जाज ज इस्पारक यदि्पत्पत सास को 10% बढ़ाया जाता है है्उताप में 10% से अधिक अधिक्वृद होती है है

पैमापैम के बढ़ते्प उत्पाप पैमापैम में्वृद, श्श-विभाजन तथा विशिष्टीकरण केाक उत्उत्पन होते हैं हैं श्श-विभाजन एवं्विशिष श्श की्पापा में्वृद मेंा है है पैमापैम के आकाआक में वृद्वृद के काक विशिष्विशिष एवं क्का वाव मशीनरीा प्प किया जा सकता है ये ये घटक पैमापैम में बढ़ते प्प उत्पन्पन करते हैं हैं

इस प्रकारक पैमापैम के बढ़ते प्प में,

उत्पादन में आनुपातिक वृद्वृद > सास की मात्ता में आनुपाआनुप वृद्वृद

पैमापैम के के बढ़ते नियम शब्शब दों में भी्व्यक किया जा सकता है है इसानियमार सास की्निश निश्उतादन प्क्त किया जा हैा अथवा उत्पादन में्उताप एक मेंादन वृद्प प्पार्प करने के्वृद क्पार्प त्के लिए के्क इस इस कथन समोत्पाप वक्वक (Iso-Produkt-Kurve) की कीासहा से्स्पष किया जा हैा है है

IP 1, IP 2, IP 3, IP 4 und IP 5 ये ये्पाद वक्र उत्पादन में एकासम वृद्वृद (अर्अराथ् 100 इकाई) को्प्रदर करता है है OS नेापैम (Skalierung) को्प्रदर शित रही है जिस जिस उत्उताप किया जा रहा है है समोत्पाद वक्वक पैमाना रेखा OS को्क बिन्दु P, Q, R तथा T बिन्बिन पराक रहे रहे हैं

P, Q, R तथा T दिये दिये गयेापैम पर्क 100, 200, 300 तथा 400 इकाइक ई्पाप दन स धन्आवश यक्पत्ति साधन A तथा B के संयोगों संयोगों संयोगों्प्रदर शित

में्चित र OP> PQ> QR> RT है्थाथ् उत्पादन में मेंासम वृद्वृद (अर्थाथ् 100 इकाई) प्रार्प करने लिए दो कमाम्ताओं क्क कमाम्तायकत की यही यहीापैम के बढ़ते प्प का नियम है।

b. पैमापैम के स्स प्प ( Konstante Rückkehr zum Maßstab):

इसके उताअनुस यदि उत्पत्ति के्समस सास को को्निश अनुपाअनुप त मेंाया जाज तो्निश चिताअनुप ता है इस प्रकार यदि उत्पत्पत सास में 10% वृद्ज की जाज है तो्उताप भी 10% बढ़ता है है इसी प्रकाजिस जिस जिसात में उत्उत्पत सास में में कमी जाज है, ठीक ठीक उसीात उत्उताप में में भी कमी कमीाज ती है

दूसरे शब्दों में, पैमाने के स्प प्प के अन्तर्तर उत्पाप एक समासम वृद्वृद धि्रार्प की की के्सम साधनों की कीान माम्तार की्आवशा पड़ेगी

चित्चित 2 से्पष्पष है कि्पाप में समासम वृद्वृद (अर्अराथ् 100 इकाई) के स्स अनुपात ताली दोाधनों A धनोंा B कीात्तार की्आवशार आवश्आवशा आवश

चित्चित में, PQ = QR = RT

जो स्थिर पैमापैम के प्प को्पष्पष करता है है

c. पैमापैम के ह्रारासम प्प (Abnehmender Return to Scale):

इसके अनुपाअनुप उत्पत्पत के केास को को जिसाअनुप में मेंाया जाता है उससे उससेाअनुप में्उताप में वृद्वृद धि है दूसरे शब्दों में, उत्पादन में एकासम वृद्वृद प्रार्प करने करने केाधनों्ताओं की आवश्यकता होगी होगी

पैमाने के ह्रासमान प्रतिफल उत्पन्न होने का मुख्य कारण यह है कि पैमाने का आकार बड़ा हो जाने के कारण उत्पादक उत्पादन कार्य में कठिनाई अनुभव करता है और आन्तरिक एवं बाह्य बचतें इस दशा में आन्तरिक एवं बाह्य हानियों (Internal & External diseconomies) में परिवर्तित हो जाती हैं हैं काक पैमाने के के्रारासम प्प उत्पन्पन होते हैं हैं

चित्चित 3 में्पष्पष किया गया है उत्पादन में समासम वृद्वृद (अर्अराथ् 100 इकाई) के्पत्ति के साधनों की आवश्आवशा पड़ेगी पड़ेगी

चित्चित में, PQ <QR <RT

जो पैमापैम के ह्रारासम प्प को स्पष्पष करता है है

पैमापैम के ह्रारासम प्प में,

उत्पादन में आनुपातिक परिवर्परिवर <सास की मात्ता में आनुपाआनुप वृद्वृद

तीनों पापैम के प्रतिफलों को समोत्पाद वक्वक की सहासेा से एक चित्चित में प्प्रदर किया जा सकता चित (देखें्चित 4)।

में्चित में OS पैमापैमा रेखा है है

इस रेखा को को तीनाभ में मेंाँटा जा सकता है:

(i) बिन्बिन P से्दु S तक → PQ> QR> RS

अर्अरात् पैमापैम के के बढ़ते्प

(ii) बिन्बिन S से्बिन K तक → ST = TK

अर्थात् पैमापैम के स्स प्प

(iii) बिन्बिन K NV्बिन V तक → KM <MN <NV

अर्अरात् पैमापैम के ह्रारासम प्प


Aufsatz Nr. 3 ( Bestimmen der Elemente der Skalenrendite ):

पैमापैम के तीनों तीनों्प के केाल होने के्भिन-भिन्भिन काक हैं:

A. पैमापैम के के रतिफल्प के केाल होने होने केाक में्निम तत्तत सम्सम हैं:

(1) सास की अविभाअविभ्जाएँ (Unteilbarkeit von Faktoren):

कुछ उत्पत्पत के केाधन निश्निश आकाआक के होते होते जिसकेाक उनको विभाजित करके प्सकत सकता सकता सकता। सास की कीाज्जा के कारण प्पार्रम में मेंास का पूर्पूर विदोहन (Optimale Auslastung) सम्सम नहीं हो होापा। पैमापैम की वृद्वृद होने पर इनाअविभ्ज सास का पूर्पूर प्प रतिफल्रार्प होते होते हैं

(2) श्श-विभाविभ (Arbeitsteilung):

प्प. चैम्चैम श्श-विभाजन को को्प का मुख्मुख कारण मानते हैं हैं श्श-विभाजन से काक्र्यका में वृद्वृद होती है जिसकेाक पैमापैम के बढ़ते बढ़ते्प प्रार्प होते हैं हैं

(3) विशिष्विशिष ( Spezialisierung):

श्श-विभाजन विशिष्विशिष को्जन देता है्विशिष अधिक्का वाषमत विशिष्विशिष साधन ये्प में मेंाल जा सकते सकते फलतः उत्पाप में वृद्वृद है है औरापैम के बढ़ते प्प मिलते हैं हैं

B. पैमापैम के्स प्प निम्निम काक के केारण प्पार्प होते हैं:

पैमापैम के बढ़ते बढ़ते्प सदैव उपस्उपस नहीं रहते रहते अविभाअविभ्ज सास के पूर्पूर विदोहन कीा में पैमापैम के प्प प्रार्प होते हैं हैं इस फरा में में्फर के उत्पादन पैमापैम में परिवर्परिवर का सास के्रयोग पड़त पा। पैमापैम के्स थिर्प केवल अल्अलापक के के्उपस होते हैं हैंाब पैमापैम के्पन्पन होते होते हैं

C. पैमापैम के के्रारासम प्प:

पैमापैम के्रारान प्प मुख्मुख यतः संगठन एवं्प्ध (Steigerung der Organisation und des Managements, wodurch die Skalenerträge sinken) की्समसाय के काक उत्उत्पन होते हैं हैं

निम्निम बिन्बिन को कोापैम के ह्रारासम प्प का कारण कहा जा सकता है:

(1) यद्यद उत्पत्पत केास को कोाआनुप तिक रूप सेाया जाता है है फिर भी्प्रबन को को उसीाकोा जा सकता। फलतः फलतःापैम के ह्रारासम प्प उत्पन्पन होते हैं हैं

(2) बड़े पैमापैम पर पराक्र जोखिमपूर्जोखिमपूर होता है है

(3) पैमापैम ने को एका केाब बढ़ाबढ़ पर परानियाँ (Diseconomies) उत्उत्पत होनी हैं हैं पैमापैम के ह्रारान प्प का यह मुख्मुख काक है है

(4) उत्पत्ति के सास पूर्पूर स्थानापन्पन (Perfekter Ersatz) नहीं नहीं काक सीमान्न उत्उताप में कमी कमी होती


Essay # 4. पैमापैम की की ( Economies of Scale):

अल्अलापक में्पत्पत के पैमापत उत्उत्पत के केापैम उत्उताप तकनीक तथा जा सकता है्किन दीर्घकाल मेंापत घक दीर्दीराघक में्पादक को्पादन आकाआक के्विस होने होने केाक, संगठन रणा उत्पादन विभिन्पारक प्पार्प होती

है्जिन दो श्श रेणियों्वर किया जा सकता है:

(1) आन्आन बचतें (Interne Volkswirtschaften)

(2) बाब्ह बचतें (Außenwirtschaft) |

(1) आन्आन बचतें (Interne Volkswirtschaften):

आन्आन बचतें वह वह बचतें जो व्व्यक फर्फर के के्तात के काक उपस्उपस होती हैं हैं जैसे-जैसे उत्पादन की मात्ता बढ़ती जाज है आन्आन बचतें फर्फर म अन्अन दर्उपस थित होती हैं आन्आन बचतें, इस्पारक, फर्फर के आकाआक का एक एक है है

उत्पाप के आकार में वृद्वृद के काक फर्फर सभी उत्पत्पत के सास को आधिक्विशिष्तर गत कुशलतास प्प रयोग कर सकती श्रम-विभाजन (Arbeitsteilung) तथा विशिष्विशिष (Spezialisierung) के्प रयोग्आन बचतें्उपस औसत्उपस थित औसत दीर दीर्दीराघक औसत लागत घट घटाज ती है

प्प. काक्डोर (Kaldor) तथा श्श जॉन्रॉबिन (Mrs. Joan Robinson) अर्थशास्स्त नेाधनों कीाज्जा (Unteilbarkeit von Faktoren) को्आन तरिका कारण माना उनके उताअनुस उत्पत्पत के कुछास अविभाअविभ्ज होते हैं हैंा उन्उन छोटी इकाइयों में्प नहींा जा ।ा।

जैसे-जैसे उत्पादन मात्ता को बढ़ाया जाता है वैसे-वैसे इन अविभाज्ज साधनों का अनुकूलतम्प सम्सम हो होाता है घटने लगतीाक गत

इस प्रकार संक्षेप में कहा जा सकता है कि श्रम-विभाजन तथा विशिष्टीकरण के कारण बढ़ती हुई श्रम की सीमान्त उत्पादकता, उचित प्लाण्ट का प्रयोग होने के कारण उत्पन्न तकनीकी बचतें (technologische Ländern), अविभाज्य साधनों का पूर्ण उपयोग, बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण, कम लाल पर उपलब्उपलब कच्चा माम आदि आन्आन बचतें उत्उत्पन करते हैं हैं इन्इन आन्आन बचतों के काक LAC गिरने लगती है है

(2) बाब्ह बचतें (Außenwirtschaft):

बाब्ह बचतें वे्तार के काक उपस्उपस होती हैंा लाल एका दोा दो्फर रित उद्उद की्द रित प्प. माम्शल ने बाह्ह बचतों विचारधारा प्रस्रस की थी थी

उनके उनकेाविच में बाह्ह बचतें्उद के आकाआक का फलन फलन हैं इस इस्रकार बाह्य बचतें्उदावा - चाच वह वह किसी भीाआक की्क न - समान रूप से से्रार्प की जाज ती हैं

जैकब वाव ने बाब्ह बचतों बचतों्निम रूप में मेंापरिभ किया है:

”बाब हरी्प्रतिषानों को्पूर्पूर उद्उदाप म्उताप मात्ता के्तात केारण प्राप्प होती्हैं्तथ हैं हैंा जो्प्प वतन्यक तिगत्तथ।

दूसरे्शब दोंा जा सकता हैाकि्ता में्वृदादन माम्ता में्वृद की कीाज तोाब्ह फर फराक्क फर्फर का लाल वक्वक र्स का लाल वक्वक र्स न्तरित Sh Shा

आन्आन बचतों ( Interne Volkswirtschaften) को्नलिखित रूप गीकृत्वर किया जा सकता है:

1. श्श-विभाविभ एवं विशिष्विशिष की की (Ökonomien der Arbeitsteilung und Spezialisierung)

2. तकनीकी बचतें (Technologische Ökonomien)

(i) प्लाल्ण का अनुकूलतम अनुकूलतम्प।

(ii) अविभाअविभ्ज साधनों का पूर्पूर उपयोग उपयोग

(iii) उत्पादन प्रक्रका में पदापद्र (Nebenprodukt) का प्प करके (उदाहरणाहरण्र, मोदी्वनस घी के पदापदारखाने में बचे पदार्र को मोदी मोदी सोप्उताप में

(iv) सम्बद्ध प्रक्रकाएँ (Verknüpfte Prozesse) आरम्आरम्रकाओं ओं्-पृथक्पृथक्रकारिय ओं, जो्भिन-भिन्न स्थानों विभिन्न उद्उद द्वावा सम्सम्ज जा एक अन उद्उद के्अन्तर दो विभाविभाय लाल आदि आदि के रूप बचतें्पार्प की जा सकती सकती

3. प्प्रबन बचतें (Management Economies)

(i) काक्रा में वृद्वृद हेतु प्प्रोतास देकर देकर

(ii) काक्याय्त विशिष्विशिष (funktionale Spezialisierung) करके करके

4. विपणन की बचतें (Marketing Economies)

5. वित्वित बचतें (Finanzwirtschaft)

6. जोखिम सम्सम्बन बचतें (Risikotragende Volkswirtschaften):

एक सास कई वस्वस का उत्उतादन करके हाह की सम्भाभा को न्न करना।

बाब बचतों ( Außenwirtschaft) Econom्निम नलिखित रूप्श्रेणीबद किया जा सकता है:

(1) कुशल्श का सस्ती दर दर्उपलबाप्प क्क योंकि्उताप दकों बीच्पा कम है्योग य्शार्प त करने

(2) परिवहन परिवहना रार के केाधनों का सुपयोगी सुपयोगीास होने होने सेातायात लागत न्न यूनतमाज है है

(3) वित्वित संस्थाओं का विकास - सस्सस दर पर परास की उपलब्उपलबा।

(4) एक एक्षेत्र स क्उद का विकास - कच्कच माम ल सहज्उपलबा।

(5) उचित्प्षण द्वावा श्श की काक्रा में वृद्वृद।

(6) अनुसन्धान एवं्वायायिक पत्रिकाओं के प्रकारक से सेा सम्बन्धी की की्पार्प।


Essay # 5. पैमापैम की हानियाँ ( Diseconomies of Scale):

एक एका के बाद जब उत्पादन मात्ता में वृद्वृद की जाती तो तोाने में में्परिवर ह तीाती ती

पैमापैम की हाहानिय भी भी प्पारक की होती हैं:

(1) आन्आन हानियाँ (Interne Diseconomies)

(2) बाब्ह हानियाँ (Externe Diseconomies)

(1) आन्आन हानियाँ (Interne Diseconomies):

आन्आन हानियों के्उपस होने का मुख्मुख यायह यह यह है कि्होताप का विस्तृत तृत्पा Organization संगठन (Produktionsorganisation) को्नियन्ताप जा कठिना कठिन होाज बड़े विभिन संगठन विभिन्विभिन इकाइयों (Verschiedene Einheiten) मेंास्मंजसा स्थाथ करना प्रबन्रबन्त्त के लिए्असम-सा होाता है है

निरीक्निरीक (Aufsicht) कार्र अवरुद्अवरुद होता है, जिसके जिसकेारण उत्पादन लाल बढ़ने बढ़ने क्क ऐसीा दश प्सम सम्सम भव नहींाता। इस प्रकार एक बिन्दु के बाद LAC वक्र ऊपर चढ़ने लगता है जो उत्पादन की अमितव्ययी दशा (Uneconomical Condition) को सूचित करता है ।

(2) बाह्य हानियाँ (External Diseconomies):

बाहरी हानियाँ मुख्यतः उद्योग के विस्तार के कारण विभिन्न साधनों की बढ़ती हुई माँग के फलस्वरूप उत्पन्न होती हैं । जब उद्योग का विस्तार होता है तब कुछ उत्पत्ति के साधनों की माँग बढ़ जाने के कारण वे दुर्लभ हो जाते हैं जिसके कारण उनकी कीमतों में भी वृद्धि हो जाती है ।

साधनों की बढ़ती हुई कीमत समान रूप से उद्योग की सभी फर्मों के लागत वक्रों को ऊपर उठा देगी । साधनों की सीमितता उद्योग की फर्मों के मध्य स्पर्द्धा (Competition) उत्पन्न करेगी क्योंकि प्रत्येक फर्म दुर्लभ साधनों को अपने उत्पादन में आकर्षित करने के लिए उन साधनों को ऊँचा मूल्य देकर दूसरी फर्मों से तोड़ने का प्रयास करेगी ।

इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि उत्पादन का एक सीमा के बाद विस्तार से आन्तरिक एवं बाह्य हानियाँ उत्पन्न होती हैं जिसके सम्मिलित प्रभाव से दीर्घकालीन लागत बढ़ने लगती है ।


 

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