Essay über die Nachfrage nach Rohstoffen Hindi | Wirtschaft

Hier ist ein Aufsatz über die "Nachfrage nach Waren" für die Klassen 9, 10, 11 und 12. Hier finden Sie kurze und lange Absätze über die "Nachfrage nach Waren", die speziell für Schüler und Studenten in Hindi geschrieben wurden.

Essay über die Nachfrage nach Rohstoffen


Essay Inhalt:

  1. माम का अर्अर एवं परिभाषा (Bedeutung und Definitionen der Nachfrage)
  2. वस्वस की माम का कारण (Ursachen der nachgefragten Waren)
  3. माम को प्रभारभ करने वाव तत्तत (Faktoren, die die Nachfrage beeinflussen)
  4. माम के प्पार (Arten der Nachfrage)
  5. माम का नियम (Gesetz der Nachfrage)
  6. माँग तालिका (Bedarfsplan)
  7. माम के नियम की की्वाय्खा (Erklärung des Gesetzes der Nachfrage)
  8. माम के के के अपवाद (Ausnahmen vom Gesetz der Nachfrage)


Essay # 1. माम का अर्अर एवं परिभाषा (Bedeutung und Definitionen der Nachfrage):

अर्अर (Bedeutung):

अर्थशास्त्र के्क्षेत में 'माम' (Nachfrage) को को एक (Pivot) की संज्संजा दी जा सकती सकती है आरारों ओर्सम्पूर आर्थिक कर्काएँ चक्चक करालग हैं किन्किन माम के पूर को समझासमझ से पूर्पूर यह आवश्आवश यक कि हम्इचा (Wunsch), आवश्यकता (Wunsch) एवं माम (Nachfrage) शब्शब के मौलिक भेद को को को

सासाम्न इन तीनों तीनों्शब को पर्परायाची मान लियाजा है किन्किन अर्थशाथश्स्त में ये तीनों्अर था अलग-अलग माम इच्छाछ अनन्अनन एवं असीमित होती हैंा सम्बन्बन मनुष्मनुष की कल्कलापन से सेा है है मनुष्मनुष की प्रत्रत कल्पना मनुष्मनुष के वाव्स जीवन में पूरी नहीं नहीं होती

माम मनोवृत्ति (Human Psychology) सदैव्मनुष को्अच-से-अच्अचा उपभोग उपभोग्मनुष के्मनुष केारेरण इन्किन तु्छाओं (Begrenzte Ressourcen) जिन्छाओं की्पूर ति के लिएास व्व करने करने कोातैय होते्वाछ हमाहम एँ्आवशाएँ (Gesucht) कहलाकहल हैं हैं

दूसरे शब्दों में, जब्क-शक्ति द्वावा पोषित पोषित्इचा पूरी कर जाती है में्परिवरा माम में प्प्येक माम में एक्क-तविक्शक का वातविक्स व्व अर्अराथ् कीमत (Preis) सदैव निहित होती जिस पर की्उपभोका उस्वस की हैाम करता हैा है इस प्रकार माँग का सम्बन्बन सदैव कीमत सेा हैा कीमत्अर हो जाती है

इच्इचा, आवश्आवशा एवं एवंाँग को को एकाहरण द्दारा समझा जा सकता है है एक व गरीब्यक्यक की वावान से सफर कल्पना करना इच्इचा की श्श में मेंा।

एक एक व व व व जब स धनी व से परिवर परिवर परिवर परिवर परिवर परिवर यह यह परिवर परिवर परिवर परिवर परिवर परिवर यह

परिभापरिभाएँ (Definitionen):

प्प. पेन्सन ( Penson) के अनुसार, ”माम एक प्रभावी इच्छा है जिसमें जिसमें्तथ सम्सम होते हैं:

(i) वस्वस को प्रार्प करने की इच्इचा,

(ii) वस्वस खरीदने के लिए लिएास उपलब्उपलबा तथा

iii) वस्वस तु के लिए सास को्व करने की तत् ”ा ”|

प्प. पेन्पेन की परिभापरिभा मुख्मुख

आवश्आवशायकत के सन्सन्दर में लाल होती होती है और्दावा माम का मौलिक्जाञ नहीं नहींा। इसके अतिरिक्त यह परिभाषा आवश्आवशा एवं माम में अन्अन भी स्स्पष नहीं करती करती इन्इन कमियों के केाक इस इसाषा को पूर्पूर परिभाषा नहींा जा सकता ।ा।

प्प. जे. एस. मिल (JS Mill) के केार, ”माँग शब्शब का अभिप्अभिपाय माँगी उस मात्ता सेाया जाना चाच जो्क की्निश हैाज ती”

प्प. बेन्बेन (Benham) के केार, ”किसी म गई कीमत कीमत्वस है माम ँग मात्ता है जो कीमत परानिश ती है”

प्प. मेयर्मेयर (Mayers) के केार, ”किसी्वस तु माँग उन उनात्ताओं की तालिका होती जिन्जिन क्का एक पर पर खरीदने कोासम रा है”

उपर्युक्त परिभाषाओं का यदि्विश किया जाये तो तोाम में्निम पाँच तत्तत निहिता आवश्आवश है:

(i) वस्वस की इच्इचा (Wunsch nach einem Guten)

(ii) वस्वस क्क के लिए्पराय्प साधन (Ausreichende Ressourcen, um das Gute zu kaufen)

(iii) सास व्व करने की्तता (Bereitschaft zu verbringen)

(iv) एक निश्निश कीमत (gegebener Preis)

(v) निश्निश समयासमय (gegebener Zeitraum)


Essay # 2. वस्वस तुओं कीाम का कारण (Ursachen für die nachgefragten Waren):

वस्वस में निहित निहित उपयोगिता के काक वस्वस की माम की जाज है है माम आवश्यकतायकत को सन्सन्तुष करने की क्का उपयोगिता कहलाकहल है है व्यक्यक किसी वस्वस की माम इसीलिए करता है्क उस वस्वस तु मेंाहम आवश्यकता को्सन्तुष करने की है्का होती होती है इस इस्रकार वस्वस की कीाम उपयोगिता का प्प है है

माम फलन ( Nachfragefunktion):

वस्वस की माम और इसे इसे्पारभ करने वाव घटकों घटकों केाफलन्त सम्बन्बन को माम ँग कहते कहते हैं

माम फलन फलन को्निम समीकरण द्दावा स्पष्पष किया जा सकता है:

यहायह :

D x = f (P x, P r, Y, T)

D x = किसी्वस (x) माम

P x = x वस्वस की की

P r = सम्बन्बन वस्वस की की

Y = उपभोक्ता की मौद्मौद आय

T = उपभोक्उपभोका की की

यदि यदि वस्वस की कीाम पर परिवर्रभाको को पारभा चाच हते हैं हमें्अन कारकों को स्स मानना ​​होता है है अन्अन बाब के स्स पर पर्वस तु की कीमत औराम्मक सम्सम्बन को ही हीाँग सम्बन्ध अथवा कीमत हैाँग कहा कहाता है है

इसे इसे्निम प्पार से से्दराशा गया है:

D x = f (P x )


Aufsatz Nr. 3 ( Faktoren, die die Nachfrage beeinflussen):

हैंाम को प्रभारभ करने करनेाव प्प तत्तत हैं:

( i) वस्वस की उपयोगिता (Nutzen des Guten):

उपयोगिता का अभिप्राय है, आवश्आवशा पूर्पूर की कीा। एक एक दी गईासमय में वस्वस की माम का आकाइस र बात पर्निर भरा पूर कि्य ति्वस है्आवशा पूर्का है है अधिक उपयोगिता वाली वस्वस की माम अधिक होगीा इसके इसके इसके विपरीता वाव वस्वस तुाम कम कम

( ii) आय आय्स (Einkommensniveau):

आय स्स का माँग पर्प्रत्यक प्रभारभ पड़ता है है उपभोक्उपभोका की स आय अधिक होगी माम उतनी उतनी ही अधिकाज तथा इसके इसके विपरीत कोा क्देग तरादेग को को को कम देगा।

( iii) धन का वितरण (Vermögensverteilung):

समासम में में धन के का भी माम पर प्पारभ पड़ता है है समासम ज में धन और का वितरण वितरण यदिाअसम है तो वर्वर द्वावा विलासिता की्वस की माम अधिक होगी अधिक जैसे-जैसे समासम में में धना वितरण वितरणासम होतायेगा वैसे-वैसे समासम में आवश्आवश व आरामदामद वस्वस की माँग बढ़तीायेगी।

( iv) वस्वस की कीमत (Preis des Guten):

वस्वस की कीमत कीमताम को को्मुख रूप से प्पारभ करती करती है कम कम कीमत वस्वस की अधिक माम तथा अधिक कीमत कीमत्वस तु कमाम होती है होती

( v) सम्बन्बन वस्वस की की (Preise für verwandte Waren):

हैं्सम्धित वस्वस दो प्पारक की की हैं:

ein. स्थानापन्पन वस्वस (Ersatzwaren):

ऐसे ऐसे्वस जिनका एक-दूसरे के प्प किया जाता है; जैसे, चीनी-गुड़, चाच-कॉफी आदि आदि

b. पूरक वस्वस (Ergänzungswaren):

ऐसी ऐसी्वस जिनका उपयोग उपयोग एकास किया जाता है; जैसे, काक-पैट्रोल, स्याय-कलम, डबलरोटी-मक्मक आदि आदि

स्थानापन्न वस्तुओं एक्परिवर वस्वस कीमत्परिवर तन्परिवर परिवर्तन वस्वस मपरिवर

( vi) रुचि, फैशन, आदि (Geschmack, Mode usw.):

वस्वस की कीाम पर उपभोक्उपभोका की की, उसकी उसकी, प्प रचलित आदि का भी्पारभ पड़ता है है किसी वस्वस विशेष का समासम में फैशन होने होने्निश रूप रूप उसकीाम ँग वृद्वृद होगी होगी

( vii) भविष्भविष में कीमत्परिवर तना (Erwartete Preisänderung in der Zukunft):

सरकासरक नियन्त्रण, दैवीय्विपत ति आशंका, युद्युद सम्भावना आदि आदि्रत्रताशित शित्वस्रताय घटकों घटकोंा पर रभ्पारभ पड़ता है है इसके अतिरिक्त जनसंख्या परिवर्तन, व्यापाप दिशा में्परिवर, जलवाजलव, मौसम मौसमा भी्पारभ वा है


Essay # 4. माम के प्पार ( Arten der Nachfrage):

हैाम को को्मुख रूप से तीन रूपों में्वर किया जा सकता है:

(1) कीमत माम (Preisnachfrage):

कीमत अभिपाम से अभिप्राय वस्वस की उन मात्तार से है जो निश्निश समयावधि ती्निशावा माँगी जाती है है 'यदि अन्अन बातें बढ़ासम रहें' तो्वस की की कीमत बढ़ाज से सेाम कम उसकी कीाज येगी

यहायह अन्अन बातें समासम रहें्शब दोंा अभिप्अभिपार यह है कि्वस तु की विशेष्वसा वस्वस तु किसी उस उपभोक्तात की्त आय आय्आयात

कीमतकीमत तुम तुम तम ँगसम समसम वकवक धवक वकवक वकवक वकवक ँगवक रर रर रर ऋणाऋण्मक ढाल वाले कीमत-माँग वक्वक को चित्चित 1 में्प्रदर किया गया है है

DD वक्वक बायें से दायें नीचे ता कीमत कीमत-माँग वक्जो जो जो बताता है वस्वस तु कीमत कीमत कीमतापा जाता है OP कीमत वस वस्वस की माम OQ है है कीमत के OP से से OP 1 हो

जाज पर अन्अन बातों के केासम न हुए हुएाँग OQ से से OQ 1 हो जाज है है

(2) आय माम (Einkommensnachfrage):

सासाम्न आयाँग का अर्अर वस्वस एवंाएवं की उन की आय वकाम वक्वक को जर्जर मनी अर्अराथश्स्त एंजिल (Engel) के नान पर एंजिल्वक (Engels Kurve) भी भीा ताता है है

आय वसाम वस्वस की प्प पर्निर होती है है

हैं्वस दो दो्वर में बाब हैंा सकती सकती:

ich. श्रेष्ठ वस्वस (Überlegene Güter),

ii. घटिया वस्वस (Minderwertige Güter).

ich. श्श्ठ वस्वस (Überlegene Güter):

श्श्ठ वस्वस के सम्सम्बन में आय आयाँग वक्वक धनात्त ढाल (Positive Pisten) वाला होता थ्अराथ् बायें सेायें चढ़ताचढ़त चढ़ता होता है श्रेष्ठ वस्तुओं का धनात्मक ढाल वाला आय माँग वक्र यह बतलाता है कि उपभोक्ता की आय में प्रत्येक वृद्धि उसकी माँग में (अन्य बातों के समान रहने पर) भी वृद्धि करती है तथा इसके विपरीत आय की प्रत्येक कमी सामान्य दशाओं में माँग में भी कमी उत्पन्न करती है है

इस स्थिति की व्याय्खा चित्चित 2 में की गई गई है चित्चित में DD आय आयाम वक्वक (श्रेष्रेष वस्वस के के) कोाबता है है OY आय स्स पर माम OQ है है आय स्स में OY से OY 1 तक वृद्वृद धि होने अन्अन बाब के समासम रहने रहने माँग भी OQ से OQ 1 हो होाज है है

ii. घटिया वस्वस (Minderwertige Güter):

घटिया वस्वस वे्वस होती होती जिन्जिन उपभोक्उपभोका हीन्दृष से देखता है है और स्स तर्पराप्प न न होने पर करता है; जैसे, मोटा अनाज, वनस्वनस घी, मोटा कपड़ा आदि आदि

ऐसी दशा में जैसे-जैसे उपभोक्ता की आय में वृद्धि होती है वैसे-वैसे उपभोक्ता इन घटिया वस्तुओं का उपभोग घटाकर श्रेष्ठ वस्तुओं के उपभोग में वृद्धि करने लगता है अर्थात् घटिया वस्तुओं के लिए आय माँग वक्र ऋणात्मक ढाल वाला बायें से दायें नीचे गिरता हुआ होता है हैा चित्र 3 में प्प्रदर किया गया है है

DD वक्वक घटिया वस्वस के लिए आयाम वक्वक बताता है है आय आय OY स्स पर परा वस्वस की माम OQ है है आय्स तर्रेष्पर 1 त्वृद धि की्कीा घटिया वस्वस की कीाम OQ से से्थाथ् वह्रेष्रेष ठ्देत भा है

आय माम ँग इसाभाभ (Paradox) पर्लैण्लैण के अर्थशाथश्स्त रॉबर्रॉबर गिफिन (Robert Giffin)

(3) Demand Demandा तिरछी माँग (Cross Demand):

अन्अन बातें समान रहने पर्वस X की की्पेक तन्परिवर्बन वस्वस Y की कीाम ँग उसे्परिवर (Cross Demand) होत कहते हैं दूसरे शब्दों में, आड़ी माँग में एक्वस की की का उसकेास्पेक सम्बन्बन दूसरी्वसारभ जा जाता है

ये ये्बन्धित व्स्स दो प्पारक की की सकती हैं:

ich. स्थानापन्पन वस्वस (Ersatzwaren):

स्थाथापन्पन वस्वस वे हैं जो एक-दूसरे के बदले एक उद्उद्देश के लिए प्प की जाज हैं; जैसे, चाच-कॉफी कॉफी ऐसी्वस तुओं्वृद जब्वृद धि्वस तु्अपरिवर तित्वृद धि्स वृद अन्अन याब तितात् स्थाथ्पन न्वस रहने्स तु्स तित्अपरिवर तित्वस रहने्स रहने्स तित उदाउदाहरण्र कॉफी की कीमत बढ़ने कीा में चाच की माम में में्वृद होगी होगी

इस इस्स को चित्चित 4 में दिखाया गया है है चित्र में DD वक्वक स्थाथान्पन वस्वस के केाम वक्वक को्रदर्रदर करता है है 1्वस Y की की OP y होने होने्साथान्पन वस्वस की माम OX 1 यदि यदि वस वस कीमत बढ़कर बढ़कर अनेक वस वस वस बढ़कर अनेक अनेक उपभोक वस वस वस वस क क उपभोग

ii. पूरक वस्वस (Ergänzungswaren):

पूरक वस्वस वे वे हैं किसी्निश उद्देश्देश की पूर्पूर के लिए लिएास प्प की जाज हैं; जैसे, स्कूटर-पैट्पैट। यदि्स कूटर्पैट तब्स धि्परिवर ज्वस पैट्पैट रोल्स रोल्वस रतिकूल्प रोल्प रभ्पड़त व्पड़त रोल्पड़त की्होत की्वृद की्परिवर नहीं्होत

इस इस्रकार पूरक्वस कीाव मात्ता में में्बन्बन पाया जाता है्प्रदर किय्चित 5 में्प्रदर किया गया है है चित्चित में DD पूरक्वस की माम रेखा है है यदि Y वस्यदि कीमत की OP 1 से से OP 2 बढ़कर जाकीमत है है Y वस्वस तु की्वस X की माँग OX 1 से घटकर OX 2 रह रहाज ती है

माम के अन्अन प्रकार ( Wenige andere Arten der Nachfrage):

( i) संयुक्संयुक माँग (gemeinsame Forderung):

यह यहाम पूरक पूरकाम का ही एक रूप रूप है है जब एक उद्उद्य की पूर्पूर ति के एक ही समय एकवस वस्वस म माम स साम संयुक संयुक्संयुक माँग कहा जाता है; जैसे, गेंद-बल्ला, जूता-मोजा, ​​स्स-पैट्रोल, आदि आदि संयुक्संयुक माँग में एक्वस का प्प दूसरे दूसरे केाअभ में नहींा जा सकता ।ा।

( ii) व्व्यूत्पन माँग (abgeleitete Nachfrage):

जब जब एक वस्वस की माम से से्वस की माम स्स वतः्उत्पन जाज ती, तो तो्रकार की माँग को को्व्यूत्पन माम कहते हैं; जैसे, कपड़े कपड़े कीाम बढ़ने बढ़ने पर उत्उताप में में्प होने वाले उत्पत्पत के सास की माम में वृद्वृद। हैं उताक है कि्पत्पत के सास की माँग होती होती्क इनकी कीाम निर्भर भर सास धन्प रयोग कियेाज ते

( iii) सास माँग (zusammengesetzte Nachfrage):

जब जब वस्वस दो या दो दो से उपयोगों मेंाम जाज है तब तब्वस की माँग कोास मास माँग कहते कहते; जैसे, कोयला, बिजली, दूध दूध आदि कोयला अनेक्प रयोगों्प किया जाता है, घर घर में भोजनाबन ने, रेलवे रेलवे में्शक हेतु, कारखारख में भट्भट का ईंधन ईंधन


Essay # 5. माम का नियम ( Gesetz der Nachfrage):

माम का नियम वस्वस की कीमत और उस कीमत पराम जाने वाली मात्ता केात्त (Qualitative) उपभोक्ता अपनी मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति के अनुसार अपने व्यवहारिक जीवन में ऊँची कीमत पर वस्तु की कम मात्रा खरीदता है और कम कीमत पर वस्तु की अधिक मात्रा । उपभोक्ता की इसी मनोवैज्ञानिक उपभोग प्रवृत्ति पर माँग का नियम आधारित है ।

माँग का नियम यह बतलाता है कि 'अन्य बातों के समान रहने पर' (Other Things Being Equal) वस्तु की कीमत एवं वस्तु की मात्रा में विपरीत सम्बन्ध (Inverse Relationship) पाया जाता है । दूसरे शब्दों में, अन्य बातों के समान रहने की दशा में किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होने पर उसकी माँग में कमी हो जाती है तथा इसके विपरीत कीमत में कमी होने पर वस्तु की माँग में वृद्धि हो जाती है ।

मार्शल के अनुसार, ”कीमत में कमी के फलस्वरूप वस्तु की माँगी जाने वाली मात्रा में वृद्धि होती है तथा कीमत में वृद्धि होने से माँग घटती है ।”

सैम्युलसन के शब्दों में, ”दिये गये समय में अन्य बातों के समान रहने की दशा में जब वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है तब उसकी कम मात्रा की माँग की जाती है…….व्यक्ति कम कीमत पर अधिक वस्तुएँ खरीदते हैं और अधिक कीमत पर कम वस्तुएँ खरीदते हैं ।”

उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि दी गई स्थिर दशाओं के अन्तर्गत वस्तु की कीमत और वस्तु की माँग में एक विपरीत सम्बन्ध पाया जाता है ।

अर्थात् , जहाँ:

P = वस्तु की कीमत

Q = वस्तु की माँग

समीकरण (1) बताता है कि कीमत बढ़ने पर माँग घटेगी तथा कीमत घटने पर माँग बढ़ेगी ।

संक्षेप में, माँग का नियम एक गुणात्मक कथन (Qualitative Statement) है, मात्रात्मक कथन (Quantitative Statement) नहीं । यह नियम केवल कीमत और माँग के परिवर्तन की दिशा बतलाता है, परिवर्तन की मात्रा को नहीं ।

'अन्य बातें समान रहें' वाक्यांश का अर्थ (Meaning of 'Other Things Being Equal'):

माँग के नियम की क्रियाशीलता कुछ मान्यताओं पर आधारित है ।

दूसरे शब्दों में , निम्नलिखित मान्यताओं के अन्तर्गत माँग का नियम क्रियाशील होता है:

1. उपभोक्ता की आय में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए (Consumer's Income Should Remain Constant) ।

2. उपभोक्ता की रुचि, स्वभाव, पसन्द, आदि में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए (Consumer's Taste, Nature, like etc. Should Remain Constant) ।

3. सम्बन्धित वस्तुओं की कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए (Prices of Related Goods Should Remain Constant) ।

4. किसी नवीन स्थानापन्न वस्तु का उपभोक्ता को ज्ञान नहीं होना चाहिए (Consumer Remains Unknown with a New Substitute) ।

5. भविष्य में वस्तु की कीमत में परिवर्तन की सम्भावना नहीं होनी चाहिए (No Possibility of Price Change in Future) ।


Essay # 6. माँग तालिका ( Demand Schedule):

किसी दिये समय पर वस्तु की विभिन्न कीमतों एवं उन कीमतों पर माँगी जाने वाली वस्तु की मात्राओं के पारस्परिक सम्बन्धों को बताने वाली तालिका माँग तालिका कहलाती है ।

दूसरे शब्दों में, एक निश्चित समय पर बाजार में दी गई विभिन्न कीमतों पर वस्तु की जितनी मात्राएँ बेची जाती हैं यदि इस सम्बन्ध को (अर्थात् कीमत व माँग के सम्बन्ध को) एक तालिका के रूप में व्यक्त किया जाये तो यह माँग तालिका कहलाती है ।

उदाहरण – माँग तालिका के विचार को एक काल्पनिक उदाहरण से समझा जा सकता है:

उपर्युक्त तालिका को यदि ग्राफ पेपर पर खींचा जाय तो चित्र 6 की भाँति हमें DD वक्र प्राप्त होता है । यही माँग वक्र है ।


Essay # 7. माँग के नियम की व्याख्या ( Explanation of Law of Demand):

अब प्रश्न उठता है कि माँग वक्र बायें से दायें गिरता हुआ क्यों होता है ? दूसरे शब्दों में, माँग का नियम क्यों लागू होता है ?

कीमत में वृद्धि होने पर माँग में कमी करने और कीमत में कमी होने पर माँग में वृद्धि करने वाले उपभोक्ता के व्यवहार के निन्नलिखित कारण हैं:

(i) घटती सीमान्त उपयोगिता नियम (Law of Diminishing Marginal Utility):

माँग का नियम घटती सीमान्त उपयोगिता नियम पर आधारित है । इस नियम के अनुसार उपभोक्ता द्वारा वस्तु की अतिरिक्त इकाइयों का उपभोग करने पर वस्तु की सीमान्त इकाइयों की उपयोगिता क्रमशः घटती जाती है । सीमान्त इकाइयों की घटती उपयोगिता के कारण उपभोक्ता वस्तु की अतिरिक्त इकाइयों की कम कीमत देना चाहता है ।

दूसरे शब्दों में, जैसे-जैसे उपभोक्ता वस्तु की अधिक इकाइयों का क्रय करेगा वैसे-वैसे वह वस्तु की कम कीमत देगा अर्थात् कम कीमत पर वस्तु की अधिक मात्रा खरीदी जायेगी ।

इसी प्रकार जब उपभोक्ता वस्तु की कम इकाइयों का उपभोग करता है तब कम वस्तु के कारण उसे ऊँची सीमान्त उपयोगिता मिलती है जिसके कारण उपभोक्ता ऊँची कीमत देने को तैयार रहता है । दूसरे शब्दों में, कम उपभोग के कारण ऊँची उपयोगिता उपभोक्ता को वस्तु की ऊँची कीमत देने को प्राप्त करती है अर्थात् ऊँची कीमत पर कम मात्रा क्रय की जाती है । यही माँग का नियम है ।

संक्संक में ,

इसी प्पारक ,

(ii) क्रय-शक्ति में वृद्धि अर्थात् आय प्रभाव (Increase in Purchasing Power or Income Effect):

वस्तु की कीमत में कमी होने पर उपभोक्ता की वास्तविक आय (अथवा क्रय-शक्ति) में वृद्धि होती है जिसके कारण उपभोक्ता को अपना पूर्व उपभोग स्तर बनाये रखने के लिए पहले की तुलना में कम व्यय करना पड़ता है । दूसरे शब्दों में, वस्तु की कीमत में कमी होने के कारण उपभोक्ता पहले किये जाने वाले कुल व्यय में ही अब वस्तु की अधिक मात्रा खरीद सकता है ।

इस प्रकार वस्तु की कीमत में कमी होने पर वस्तु का अधिक क्रय सम्भव हो पाता है । यही माँग का नियम है । इसके विपरीत वस्तु की कीमत में वृद्धि के कारण उपभोक्ता की वास्तविक आय (अथवा क्रय-शक्ति) में कमी होती है जिसके कारण वस्तु का उपभोग घट जाता है । यही माँग का नियम है ।

इसी प्पारक ,

( iii) प्रतिस्थापन प्रभाव (Substitution Effects):

वस्तु की कीमत एवं माँग के विपरीत सम्बन्ध (अथवा ऋणात्मक सम्बन्ध) का कारण प्रतिस्थापन प्रभाव है । जब एक ही आवश्यकता की पूर्ति दो या अधिक वस्तुओं से सम्भव होती है तब अन्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहने की दशा में एक वस्तु की कीमत का परिवर्तन मूल वस्तु के उपभोग में इसलिए परिवर्तन कर देता है क्योंकि उपभोक्ता मूल वस्तु एवं स्थानापन्न वस्तु के प्रयोग अनुपात में परिवर्तन कर देता है । यही प्रतिस्थापन प्रभाव (Substitution Effect) है ।

उदाहरणार्थ, चीनी और गुड़ एक ही उद्देश्य की पूर्ति करते हैं । चीनी और गुड़ में यदि चीनी की कीमत में कमी हो जाती है तब अनेक उपभोक्ता गुड़ का उपभोग छोड़कर चीनी के उपभोग पर प्रतिस्थापित हो जायेंगे जिसके कारण चीनी की माँग में वृद्धि हो जायेगी ।

इसके विपरीत यदि चीनी की कीमत में वृद्धि होती है तब अनेक उपभोक्ता चीनी का उपभोग न कर पाने के कारण गुड़ के उपभोग पर प्रतिस्थापित हो जायेंगे जिसके फलस्वरूप चीनी की माँग में कमी हो जायेगी । इस प्रकार स्पष्ट है कि प्रतिस्थापन प्रभाव के कारण वस्तु की कीमत कम होने पर उसकी माँग बढ़ती है और कीमत के बढ़ने पर माँग घटती है ।

( iv) क्रेताओं की संख्या में परिवर्तन (Change in Consumer ' s Number):

वस्तु की कीमत पर परिवर्तन उपभोक्ता की संख्या को भी प्रभावित करता है । जब किसी वस्तु की कीमत में कमी होती है, तो कुछ ऐसे उपभोक्ता भी उस वस्तु का उपभोग करने लगते हैं जो आरम्भ में ऊँची कीमत के कारण उपभोग करने में असमर्थ थे । ऐसी दशा में वस्तु की माँग बढ़ जाती है ।

इसके विपरीत जब किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है तो अनेक उपभोक्ता अपनी सीमित आय के कारण उस वस्तु का उपभोग बन्द कर देते हैं जिसके कारण वस्तु की माँग घट जाती है । यही माँग का नियम है ।


Essay # 8. माँग के नियम के अपवाद ( Exceptions to Law of Demand):

कुछ दशाओं में कीमत और माँग का प्रतिलोम सम्बन्ध क्रियाशील नहीं होता । ऐसी दशाओं को नियम का अपवाद कहा जाता है ।

जो निम्निम हैं:

( i) भविष्य में कीमत वृद्धि की सम्भावना (Expected Rise in Future Price):

कुछ भावी प्रत्याशित परिस्थितियों के कारण जैसे युद्ध, अकाल, क्रान्ति, सरकारी नीति, सीमित पूर्ति जैसी सम्भावनाओं में कीमत वृद्धि के बावजूद माँग में उत्तरोत्तर वृद्धि होती चली जायेगी क्योंकि उपभोक्ता भविष्य में और कीमत वृद्धि की आशंका से वर्तमान में माँग को बढ़ा देगा ।

ऐसी दशा में कीमत और माँग में प्रतिलोम सम्बन्ध न होकर सीधा सम्बन्ध (Direct Relationship) होता है और माँग वक्र बायें से दायें ऊपर की ओर चढ़ता हुआ बन जाता है ।

( ii) प्रतिष्ठासूचक वस्तुएँ (Prestigious Goods):

प्रतिष्ठासूचक वस्तुओं में मिथ्या आकर्षण (False Show) के कारण माँग का नियम क्रियाशील नहीं होता । समाज का धनी वर्ग अपनी श्रेष्ठता प्रदर्शित करने के लिए ऊँची कीमत वाली वस्तुओं का अधिक क्रय करता है । हीरे-जवाहरात, बहुमूल्य आभूषण, कीमती कलाकृतियाँ आदि वस्तुओं की माँग पर कीमत परिवर्तन का प्रभाव नहीं पड़ता ।

वास्तविकता तो यह है कि इन वस्तुओं की कीमतों में जैसे-जैसे वृद्धि होती जाती है धनी वर्ग मिथ्या आकर्षण के वशीभूत होकर इन वस्तुओं की माँग भी बढ़ाता जाता है ।

( iii) उपभोक्ता की अज्ञानता (Ignorance of Consumer):

जब उपभोक्ता अपनी अज्ञानता के कारण ऊँची कीमत देकर यह अनुभव करता है कि उसने अधिक टिकाऊ एवं श्रेष्ठ वस्तु खरीदी है तब ऊँची कीमत माँग को प्रभावित नहीं करती ।

उसके अतिरिक्त जब किसी वस्तु की कीमत घटाई जाती है तब उपभोक्ता अपनी अज्ञानता के कारण कम कीमत वाली वस्तु को घटिया समझकर उपभोग नहीं करता । ऐसी दशा में कीमत घटने पर उपभोग अधिक होने के स्थान पर कम हो जाता है और माँग का नियम क्रियाशील नहीं होता ।

( iv) गिफिन का विरोधाभास (Giffin ' s Paradox):

जब उपभोग की दो वस्तुओं में एक घटिया वस्तु (Inferior Good) हो तथा दूसरी श्रेष्ठ वस्तु (Superior Good) हो तब गिफिन का विरोधाभास उत्पन्न होता है । घटिया वस्तुएँ वे होती हैं जिनका उपभोग उपभोक्ता द्वारा इसलिए किया जाता है क्योंकि उपभोक्ता अपनी सीमित आय और श्रेष्ठ वस्तु की ऊँची कीमत के कारण कम कीमत वाली वस्तु अर्थात् घटिया वस्तु का उपभोग करता है ।

ऐसी दशा में घटिया वस्तु की कीमत में जब कमी होती है तब उपभोक्ता कीमत के घटने के कारण सृजित अतिरिक्त क्रय-शक्ति से अच्छी वस्तु का उपभोग बढ़ा देता है तथा घटिया वस्तु का उपभोग घटा देता है । इस प्रकार घटिया वस्तु की कीमत में कमी होने पर उसकी माँग में कमी होती है ।

माँग के इस विरोधाभास की ओर सर्वप्रथम इंग्लैण्ड के अर्थशास्त्री रॉबर्ट गिफिन (Robert Giffin) ने ध्यान आकृष्ट किया था । सम्मानार्थ उन्हीं के नाम पर इसे 'गिफिन का विरोधाभास' (Giffin's Paradox) के नाम से जाना जाता है ।

गिफिन विरोधाभास वाली घटिया वस्तु के माँग वक्र को चित्र 7 में दिखाया गया है । चित्र में DD घटिया वस्तु का माँग वक्र है जो बायें से दायें ऊपर की ओर बढ़ता हुआ है । OP कीमत पर उपभोक्ता घटिया वस्तु की OQ मात्रा क्रय करता है ।

जब उपभोक्ता की क्रय-शक्ति में, घटिया वस्तु की कीमत घटने (चित्र में OP से OP 1 ) से वृद्धि होती है तब उपभोक्ता घटिया वस्तु का उपभोग OQ से OQ 1 तक घटाकर श्रेष्ठ वस्तु की ओर उपभोग बढ़ा देता है । दूसरे शब्दों में, घटिया वस्तु की कीमत घटने पर उसकी माँग में कमी होती है । यही माँग के नियम का अपवाद है ।


 

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